कुर्सी की राजनीति, क्या बचा पाएंगे देश को……

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कुर्सी की राजनीति
कुर्सी की राजनीति, क्या बचा पाएंगे देश को?

भारत एक लोकतांत्रिक देश है जहाँ जनता को अपना उम्मीदवार चुनने का पूरा अधिकार है।  इसका मतलब लगभग 125 करोड़ की जनसँख्या वाले भारत देश के वासियों को पूर्ण अधिकार है की वे अपना सही उम्मीद्वार चुने जो केवल कुर्सी की राजनीति न करे बल्कि देश को ठीक तरह से चला पाए और देश को उन्नति की ओर ले जा पाए।

कैसे होगी देश की तरक्क़ी ?

देश को चलाने वाले मुख्य पद में सबसे बड़ा पद प्रधानमंत्री का और राज्य को चलाने के लिए मुख्य पद मुख्यमंत्री का है। उत्तर प्रदेश, पंजाब, गोवा, मणिपुर और उत्तराखंड में 2017 में होने वाले चुनाव में देश के इन राज्यों की भागदौड़ किसके हाथ में आयेगी वो तो चुनाव के बाद ही पता चलेगा । लेकिन एहम मुद्दा यह है की जिसके भी हाथ सरकार लगेगी वह देश की तर्रकी में अपना क्या योगदान देगा !

 

bangayamuda election-2017
Image Credit: Times of India

हमारे देश में नेता राजनीती करने में तो बहुत आगे है, लेकिन देश की तरक्क़ी के लिए कोई नहीं सोचता। नेता कुर्सी की राजनीति करते हैं और बस अपनी तरक्क़ी पर ध्यान देते हैं।

 क्या कोटा देना सही है?

हमारे नेता चुनाव के वक़्त जनता को तरह तरह के लालच देते है, जैसे SC/ST कोटा, मुस्लिम कोटा, फ्री लैपटॉप आदि । क्या इन सब से देश या देश के लोगों की तरक्क़ी होगी?  क्या सिर्फ लैपटॉप या कोटा दे देने से हमारे देश के युवा पीढ़ी तरक्क़ी कर पायेगी? आप लोग तो कोटा के बाद देश की हालत से वाकिफ ही हैं।

“जागरूक बने, वोट जरुर दे”

देश की जनता को अब जागरूक होना होगा। जनता को वोट देने जाना होगा और अपना नेता ध्यान से चुनना होगा। अगर देशवासी तरक्की करेंगे तो देश तरक्क़ी करेगा।

“Use your vote, Serve your country”

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