भगवान् भी यहाँ पर प्राचीन काल से वास करते आ रहें है : मेरठ(Meerut)

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भगवान् भी यहाँ पर प्राचीन काल से वास करते आ रहें है : मेरठ(Meerut)

मेरठ(Meerut)  शहर यहाँ पर भगवान् भी प्राचीन काल से वास करते आ रहें हैं। हस्तिनापुर हो, सलावा या सरधना : सब जगह प्राचीन काल से यहाँ हैं। यह जगह हिन्दू , जैन आदि धर्मों की बहुत पवित्र जगह हैं। हमारे पहले लेख में हमने इन्ही जगहों के बारे में बताया था। सिर्फ 1857 की क्रांति नहीं है मेरठ(Meerut) में..यह भी है…

अब जानते हैं और जगह जो मेरठ शहर को और भी प्रसिद्ध बनतीं हैं :

9) सैंट जॉन चर्च (St. John’s Church)

यह चर्च पूरे उत्तर भारत में सबसे पुराना चर्च है। यह चर्च 1819 से 1821 के बीच बना था। चर्च के पास ही कब्रिस्तान (cemetery) है। चर्च के पास हरा -भरा और शान्त वातावरण है।

10)  अबू लेन (Abu Lane)

अबू लेन मेरठ का प्रसिद्ध मार्किट है। यह मार्किट थोडा तंग और पुराना है लेकिन यहाँ आपके जरुरत की सारी सामग्री मिलती है। और यहाँ पर खाने का भी सामान बहुत अच्छा मिलता है जिसे आप चटकारे लेकर खा सकते हैं। खासकर चाट पकोड़े और मसालेदार खाने वाले लोग यहाँ के चाट के दीवाने हैं।

11) हस्तिनापुर का श्वेताम्बर जैन मंदिर (Hastinapur Shwetambar Jain Temple)

जैन पंथ के श्वेताम्बरी समुदाय का बहुत बड़ा मंदिर यहाँ स्थित है। यह मंदिर बहुत मंजिल बड़ा है जिसे जैन प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ के मोक्षस्थान “अष्टापद” का प्रारूप दिया गया है। इस मंदिर में आदिनाथ भगवान् की बहुत सुन्दर प्रतिमा विराजमान है।

12) श्री शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर (Shri Shantinath Digamber Jain Temple)

मेरठ का सबसे प्राचीन मंदिर जैन मंदिर तीर्थंकर शांतिनाथ भगवान् का है। भारतीय सरकार ने इस मंदिर को प्राचीन कला के कारण अपनी संरक्षा में रखा है।

13) ध्यान मंदिर (Meditation/dhyan mandir)

अगर आप मान में शांति चाहते हैं तो यहाँ जरुर जाएँ। यह मंदिर खासकर ध्यान लगाने के लिए बनाया गया है।  यह मंदिर मेरठ जिले के हस्तिनापुर में है।

14) शहीद स्मारक (Shahid Smarak)

खासकर 1857 के वीरों को श्रधांजलि देने के लिए यह स्मारक बना था। इसके पास म्यूजियम है जहाँ पर 1857 के वीरों की पेंटिंग आदि हैं।

15) काली पलटन मंदिर (Kali Paltan Mandir)

यह मंदिर बहुत पुराना है, किसी को इसका इतिहास नहीं पता की यह मंदिर कब बना था। 1857 के लड़ाई में इस मंदिर का खास योगदान था। यहाँ पर चमत्कारिक रूप से शिव लिंग उत्पन्न हुआ था। इस मंदिर को औगरनाथ का मंदिर भी कहते हैं।

16) मनसा देवी मंदिर (Mansa Devi Temple)

देवी शक्ति की स्वरूपा देवी मनसा का यह मंदिर बहुत प्राचीन है और सूरज कुंड के पास स्थित है। इतिहास में लिखा है की जब लंकापति रावण तपस्या के बाद शक्ति को अपने साथ ले जा रहें थे तब शक्ति यहाँ छुट गयी थी। तभी से यहाँ मनसा देवी का मंदिर बना हुआ है।

पहला भाग यहाँ पढें :

सिर्फ 1857 की क्रांति नहीं है मेरठ(Meerut) में..यह भी है…

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